सभी का खून शामिल है यहां की मिट्टी में,
किसी के बाप का हिंदुस्तान थोड़ी है...
शायर राहत इन्दोरी की गजलें कई दशक पहले लिखी गई, देश में आज के बदले हालात में फिर यह सटीक है। देश जल रहा है, इसे सम्भालने में देरी समझ से परे है। दिल्ली के यह हालात हो रहे है, यह बेहद शर्मनाक है, पूरी दुनिया तमासा देख रही है। खो रहा चैन ओ अमन... इसे हम सभी को ही मिलकर सम्भालना है...
इन्हीं में एक गजल है-https://www.youtube.com/watch?v=ZBTObQ7QGPo
‘अगर खिलाफ हैं होने दो जान थोड़ी है,
ये सब धुआं है कोई आसमान थोड़ी है,
लगेगी आग तो आएंगे घर कई जद में,
यहां पे सिर्फ हमारा मकान थोड़ी है,
जो आज साहिबे मसनद हैं कल नहीं होंगे, किराएदार हैं जाती मकान थोड़ी है,
सभी का खून है शामिल यहां की मिट्टी में, किसी के बाप का हिंदुस्तान थोड़ी है’।
ये सब धुआं है कोई आसमान थोड़ी है,
लगेगी आग तो आएंगे घर कई जद में,
यहां पे सिर्फ हमारा मकान थोड़ी है,
जो आज साहिबे मसनद हैं कल नहीं होंगे, किराएदार हैं जाती मकान थोड़ी है,
सभी का खून है शामिल यहां की मिट्टी में, किसी के बाप का हिंदुस्तान थोड़ी है’।
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