GDP क्या है जीडीपी से आप क्या समझते है ?
![]() |
| GDP (Gross domestic product) जीडीपी (सकल घरेलु उत्पाद) |
जीडीपी का फुल फॉर्म (full form of GDP):-
सकल घरेलु उत्पाद होता है | इंग्लिश मे इसे Gross Domestic Product कहते है एक वर्ष मे एक देश की सीमा के अंदर सभी अंतिम माल (Final Product) और सेवाओं (Services) का बाजार मूल्य (Market Price) जीडीपी (GDP) कहलाता है आसान शब्दों मे कहे तो, जीडीपी वह राशि है जो एक देश एक साल मे उत्पादन करता है
![]() |
| GDP (Gross domestic product) जीडीपी (सकल घरेलु उत्पाद) |
जीडीपी की परिभाषा समझने के लिए इसके हर परिभाषित शब्द को समझना जरूरी है तो अब हम हर शब्द को अच्छे से समझने की कोशिश करेंगे और इसे समझने के लिए कुछ उदाहरणो का इस्तेमाल भी करेंगे
जीडीपी की परिभाषा (GDP(जीडीपी) क्या है )
1) अंतिम माल (final product) :- जब कोई भी चीज़ या वस्तु पूरी तरह से तैयार होकर बाजार मे बिकने के लिए आती है तो उसे अंतिम माल (final product) बोलते हैं
उदाहरण के तौर पर एक गाड़ी को बनाने में टायर ,इंजन ,स्टील ,लोहा ,मजदूरी इत्यादि चीज़ें लगती हैं फिर उस पर सरकार का टैक्स लगता है इन सब चीज़ों का मूल्य जोड़कर उस गाड़ी की कीमत तैयार होकर बाजार में अंतिम माल (final product) के तौर पर बिकने के लिए आती है इसे हम अंतिम माल कहतें हैं
2) सेवाएं (Services):- जब हम बीमार पड़ जातें हैं तो डॉक्टर को दिखातें हैं डॉक्टर आपको अपनी सेवाए देकर ठीक करता है और बदले मे आपसे कुछ पैसे लेता है हमारी सरकार हम लोगो द्वारा टैक्स के रूप मे मिले पैसों से स्कूल ,कॉलेज ,हॉस्पिटल आदि चीज़ें बनाकर सेवाऐ प्रदान करती है तो ये सब चीज़ें सेवाओं की श्रेणी में आती हैं
3) देश की सीमा :- जीडीपी मे सिर्फ देश की सीमाओं के अंदर ही हो रहे व्यापर को जीडीपी मे जोड़ा जाता है उदाहरण के लिए अगर कोई विदेशी कंपनी अपने देश में चीज़ें बनाती है तो उसकी आमदनी भी हमारे देश की जीडीपी मे जोड़ी जाती है
![]() |
| GDP (Gross domestic product) जीडीपी (सकल घरेलु उत्पाद) |
जिस तरह इंडिया में दिवाली के समय बहुत सारा चीन से आयात (import) किया हुआ माल बेचा जाता है, तो ये पैसा चीन की जीडीपी मे जुड़ता है अब तो आप समज ही गए होंगे की दिवाली के समय चीन का माल नहीं खरीदने पर इतना हंगामा क्यों होता है
इन चीज़ों को समझने के बाद आप दोबारा जीडीपी की परिभाषा को पढ़िए अब आपको जीडीपी की परिभाषा आसानी से समज में आ जाएगी कि GDP(जीडीपी) क्या है
जीडीपी (GDP,सकल घरेलू उत्पाद) को मापने का फार्मूला
इस समीकरण में उपभोग और निवेश अंतिम माल और सेवाओ पर किये जाने वाले व्यय हैं।
समीकरण का निर्यात - आयात वाला भाग (जो अक्सर शुद्ध निर्यात कहलाता है), घरेलू रूप से उत्पन्न नहीं होने वाले व्यय के भाग को घटाकर (आयात) और इसे फिर से घरेलू क्षेत्र में जोड़ कर (निर्यात) समायोजित करता है।
अर्थशास्त्री (कीनेज के बाद से) सामान्य उपभोग के पद को दो भागों में बाँटना पसंद करते हैं; निजी उपभोग और सार्वजनिक क्षेत्र का (या सरकारी) खर्च.
सैद्धांतिक मैक्रोइकॉनॉमिक्स में कुल उपभोग को इस प्रकार से विभाजित करने के दो फायदे हैं:
- निजी उपभोग कल्याणकारी अर्थशास्त्र का एक केन्द्रीय मुद्दा है। निजी निवेश और अर्थव्यवस्था का व्यापार वाला भाग अंततः (मुख्यधारा आर्थिक मॉडल में) दीर्घकालीन निजी उपभोग में वृद्धि को निर्देशित करते हैं।
- यदि अंतर्जात निजी उपभोग से अलग कर दिया जाए तो सरकारी उपभोग को बहिर्जात माना जा सकता है,
- जिससे सरकारी व्यय के विभिन्न स्तर एक अर्थपूर्ण व्यापक आर्थिक ढांचे के भीतर माने जा सकते हैं।
GDP(सकल घरेलु उत्पाद )= उपभोग +सकल निवेश +सरकारी खर्च + (निर्यात -आयात ) ,याGDP= C+ I+ G+ (X-M) .
- उपभोग (C): यह जीडीपी मे निजी उपभोग होता है व्यक्तिगत घरेलु खर्च जैसे खाना, किराया, चिकित्सा आदि पर हुआ खर्च इसमें शामिल है
- निवेश (I): नया घर लेना, किसी फैक्ट्री मे नई मशीन, सॉफ्टवेयर इत्यादि, यानि धन को माल या सेवाओं मे बदलना ही निवेश है ध्यान रहे म्यूच्यूअल फण्ड, स्टॉक या बॉन्ड जैसे निवेशो को जीडीपी से अलग किया जाता है लेकिन ये जीडीपी को बहुत प्रभावित करते है क्योंकि स्टॉक या बांड जैसे निवेश वित्तीय पूंजी को प्रभावित करते हैं जो निवेश को प्रभावित करते हैं
- GSTR9 कैसे भरें आखिर है क्या?
- सरकारी व्यय (G): सरकारी कर्मचारियों के वेतन ,सेना को सशक्त बनाने पर खर्च, स्कूल, रोड, अस्पताल इत्यादि सरकारी व्यय मे आते हैं
- निर्यात (X): अपने देश मे उत्पादन करके दूसरे देशों को बेचना निर्यात कहलाता है इसे जीडीपी मे जोड़ा जाता है
- आयात (M): दूसरे देशों मे उत्पादित चीजों को अपने देश मे लाना आयात कहलाता है इसे जीडीपी से घटाया जाता है
एक देश के लिए ये बहुत महत्व की चीज़ है जानकारी के लिए बता दें की भारत की जीडीपी मे एग्रीकल्चर (agriculture), सर्विसेज (services) और इंडस्ट्रीज (industries) की अहम भूमिका है



0 Comments:
Post a Comment